चम्पावत: लापरवाही ने ली होनहार सोमेंद्र की जान; परिवार का इकलौता सहारा छिना, कॉलेज प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

चम्पावत: लापरवाही ने ली होनहार सोमेंद्र की जान; परिवार का इकलौता सहारा छिना, कॉलेज प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

Negligence Claims the Life of Promising Somendra

Negligence Claims the Life of Promising Somendra

चंपावत। राजकीय पालीटेक्निक कालेज में हुई छात्र सोमेंद्र की मौत ने व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रही लापरवाहियों ने एक परिवार के इकलौते बेटे की जिंदगी छीन ली। इससे पहले भी फरवरी में लैब में रसायन गिरने से कई छात्राएं घायल हुई थीं, लेकिन इसके बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ।

सोमेंद्र सिंह बोहरा अपने परिवार का सहारा थे। उनके पिता भूपाल सिंह बोहरा रोजगार के लिए गुजरात में रहते हैं, जबकि मां दीपा और तीन बहनों की जिम्मेदारी काफी हद तक सोमेंद्र के कंधों पर थी। वह पढ़ाई के साथ घर की जरूरतों का भी ध्यान रखते थे और खेलों में भी सक्रिय थे।

इतना ही नहीं, खेल मैदान में प्राथमिक उपचार की कोई व्यवस्था नहीं थी और न ही एंबुलेंस या स्वास्थ्य टीम तैनात की गई थी। जबकि अस्पताल पास में ही स्थित था, लेकिन समय पर उचित सहायता नहीं मिलने से छात्र की जान नहीं बचाई जा सकी।

गोला फेंक और भाला फेंक जैसे जोखिम भरे खेलों के लिए विशेषज्ञों की अनुपस्थिति भी गंभीर लापरवाही को दर्शाती है। इस घटना के बाद पूरे मामले की जांच की मांग उठ रही है कि आखिर इस मौत के लिए जिम्मेदार कौन है।

फारेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

घटना के बाद गोरलचौड़ मैदान में मोबइल फारेंसिक टीम पहुंची। उन्होंने वहां से साक्ष्य एकत्रित किया। साथ ही वह उपस्थित शिक्षकों से पूछताछ कर जानकारी प्राप्त की।

घटना के बाद मां व दो बहने हुई बेहोश

सोमेंद्र के मौत की खबर लगते ही उसकी मां दीपा बेहोश हो गई। वहीं दो बहने भी बिलखते हुए बेहोश हुई। जिला अस्पताल में तीनों को ड्रिप लगाया गया। बहनों के होश में आने पर उन्हें घर लोग ले गए।